PM Surya Ghar Yojana या रिश्वत का खेल? CSPDCL कर्मचारी देवेंद्र कुमार विश्वकर्मा सोलर प्लांट सिंक्रोनाइजेशन के लिए मांगे पैसे, 18 दिनों तक नहीं किया सिंक्रो का काम

PM Surya Ghar Yojana: रायपुर/कुम्हारी। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत देशभर में बड़ी संख्या में घरों पर सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं. सरकार का उद्देश्य लोगों को सौर ऊर्जा से जोड़ना और बिजली के खर्च को कम करना है. लेकिन इसी योजना का फायदा ऊठा कर बिजली विभाग के कुछ कर्मचारी अपनी जेब भरने में लगे हुए है. ऐसा ही एक मामला कुम्हारी CSPDCL से सामने आया है, जहां एक उपभोक्ता ने अपने घर पर सोलर प्लांट लगवाया था. प्लांट का काम पूरा होने के बाद CSPDCL से जुड़ी प्रक्रिया में डिटेल भरने और प्लांट को सिंक्रोनाइज करने का काम होना था. आरोप है कि इस काम को आगे बढ़ाने के लिए CSPDCL कर्मचारी देवेंद्र कुमार विश्वकर्मा ने पैसे की मांग की.

11 दिन तक काम रोककर रखा काम

मिली जानकारी के अनुसार, सोलर प्लांट से जुड़ा काम पूरा होने के बाद भी करीब 11 दिन तक CSPDCL की संबंधित प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी. जब लंबे समय तक काम नहीं हुआ तो उपभोक्ता ने खुद देवेंद्र कुमार से संपर्क किया और काम की स्थिति के बारे में पूछा. इसी बातचीत के दौरान देवेंद्र कुमार विश्वकर्मा द्वारा कथित तौर पर पैसे की मांग की गई.

उपभोक्ता का कहना है कि उसे साफ तौर पर बताया गया कि पैसे देने के बाद ही काम आगे बढ़ेगा. काम अटकने और लगातार देरी के कारण आखिरकार उपभोक्ता ने देवेंद्र कुमार को पैसे दिए.

इस भुगतान से संबंधित स्क्रीनशॉट

PM Surya Ghar Yojana, Devendra Kumar Vishwakarma
PM Surya Ghar Yojana, Devendra Kumar Vishwakarma

उपभोक्ता के मुताबिक, इस दौरान उसे स्पष्ट तौर पर बताया गया कि पैसे देने के बाद ही काम आगे बढ़ेगा. काम अटकने के कारण आखिरकार उपभोक्ता ने अपनी जेब से पैसे देने का फैसला किया, ताकि उसकी सोलर प्लांट से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सके. यहीं से इस पूरे मामले पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है- अगर यह विभागीय प्रक्रिया है, तो इसके लिए उपभोक्ता से अलग से पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं?

अब सीधा सवाल है कि अगर सोलर प्लांट से जुड़ी डिटेल दर्ज करना और विभागीय प्रक्रिया के तहत उसे सिंक्रोनाइज करना संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी है, तो इसके लिए अलग से पैसे क्यों मांगे जा रहे हैं? उसके अनुसार, देवेंद्र कुमार ने कई बार यह भी कहा कि हर वेंडर उसे इस तरह के काम के लिए पैसे देता है.

अगर यह बात सही है, तो मामला केवल एक उपभोक्ता से पैसे मांगने तक सीमित नहीं रह जाता. फिर यह सवाल उठता है कि क्या इस तरह का कोई अनौपचारिक भुगतान लंबे समय से चल रहा है? क्या दूसरे वेंडरों और उपभोक्ताओं से भी इसी तरह पैसे लिए जा रहे हैं? और अगर ऐसा हो रहा है, तो इसकी जानकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को है या नहीं?

Call Record और Video Proof

UNABLE TO LOAD

आखिर क्या कर रहे है AE और Executive Engineer?

मामले में अब CSPDCL के संबंधित Assistant Engineer (AE) और Executive Engineer (EE) की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. उपभोक्ता जानना चाहते है कि संबंधित कर्मचारी के खिलाफ शिकायत मिलने पर विभाग क्या कार्रवाई करेगा. क्या मामले की विभागीय जांच होगी? क्या देवेंद्र कुमार से पूछताछ की जाएगी? क्या दूसरे वेंडरों और उपभोक्ताओं से भी जानकारी ली जाएगी?

क्या उन्हें देवेंद्र कुमार विश्वकर्मा द्वारा पैसे मांगने की जानकारी है? क्या विभाग इस मामले की जांच करेगा? क्या देवेंद्र कुमार से पूछताछ होगी?

उपभोक्ता का कहना है कि उसने सोलर प्लांट का काम पूरा कराया और अपनी ओर से जरूरी भुगतान भी किया. उसके बाद विभागीय प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उसे किसी कर्मचारी को अलग से पैसे देने के लिए कहा जाना बेहद गंभीर विषय है.

उपभोक्ता का सवाल है कि अगर हर काम के लिए अलग से पैसे देने पड़ेंगे, तो सरकारी विभाग और कर्मचारी की जिम्मेदारी क्या रह जाती है?

तो आखिर क्यों इतने दिनों तक रुका रहा काम?

इस मामले में 18 दिन की देरी भी सवालों के घेरे में है. उपभोक्ता के अनुसार, उसने काम के लिए संपर्क किया था, लेकिन 11 दिन तक कोई स्पष्ट प्रगति नहीं हुई. जब उसने खुद फोन कर स्थिति पूछी, तब कथित तौर पर उससे पैसे की मांग की गई.

CSPDCL को करनी चाहिए मामले की जांच

अब देखना यह है कि CSPDCL इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है. क्या देवेंद्र कुमार विश्वकर्मा के खिलाफ जांच कब तक शुरू होगी? क्या उनके कथित बयान की जांच की जाएगी? क्या दूसरे वेंडरों से भी पूछताछ होगी? और अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होगी?

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